Thursday, September 24, 2015

..."The Deep Blue "....!!!

…....... दोएल , को आज , पृथ्वी की  दस  बड़ी  नदियां  के बारे मे  पढ़ाया  …… ३ दिनों   की छुट्टी है। …जबरदस्त मौका हैं। …सुबह सुबह  माले  शहर  का  तीन चक्कर  काटा  हमने   …… सुबह  की  ड्राइव मजेदार होती हैं   .... कहीं भी रुक जाओ समुन्दर को छू लो   .... दोएल  कबूतर के साथ खेलने लगी और अर्णव  और  मैं  सुनामी  मीनार  के  लगून   मे  प्राइम एलिमेंट नाम्नी समुन्दर मे  एकाकार  हो गए। …ंन  जाने कितनी बार हमने इस समुन्दर को छुआ हैं।  .... हर बार  थपेड़े  खाते…मछलियो  के साथ डुबकी  लगाते और  रोमांचित होते हैं  …… बहुत ही छोटा महसूस होता है  अथह   सागर के  सामने …समुन्दर  की गर्जन और  बच्चो  का कलरब  ....  एक   ठहरा हुआ  पल   …… कोरल  को छूता  हुआ  पाँव   …एक अरसे के  बाद  ....इस  शहर  से  एक गहरा  नाता  …जुड़ता   नजर आया  .... बहुत कुछ  दिया इस समुन्दर ने। …मेरा  फेवरिट  " द  डीप  ब्लू  ".... दस  बड़ी  नदियां  पढ़ाते  पढ़ाते  ....... बहते चले गए   …।मिस्र  की  सभय्ता , अमेज़न  की रेन फारेस्ट , वोल्गा, लेना,यंगस्ते, टॉम  सॉयर और हक  फिन  की  मिस्सिस्सिपिमिस्सौरी  , और डाउन अंडर.... मुर्रे डार्लिंग  नदी  और  हमारी गंगा मैया  …… एक तार  गोमुख से  गंगासागर तक।   एक दिल से  जुड़ा  हुआ तार   …तरंगित  करता  ,दिल को छूता  , पबित्र   करता , इस   महासागर मे ....!!!!

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